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Education Survey

7वीं सर्वेक्षण
 
7वीं अखिल भारतीय विद्यालय शैक्षिक सर्वेक्षण रिपोर्टें
विद्यालय शिक्षा की सांख्यिकी एवं सूचकों पर मैनुअॅल
विद्यालय शिक्षा का एटलस
 

एनसीईआरटी द्वारा आवधिक रूप से संचालित अखिल भारतीय शैक्षिक सर्वेक्षण (एआईईएस) का मुख्यआ उद्देश्य विद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में देश की संपूर्ण प्रगति की जानकारी का संग्रह, संकलन और प्रचार-प्रसार करना है। ये सर्वेक्षण लघु (व्य ष्टिगत स्तईर के साथ-साथ बृहत्तऔ (समष्टिगत) स्तपर पर शैक्षिक योजनाओं के विकास, शैक्षिक नीतियों का प्रतिपादन और केंद्र एवं राज्य सरकारों की विभिन्नन शैक्षिक योजनाओं की प्रगति के अनुवीक्षण हेतु मूल आधार प्रदान करते हैं। इसमें ग्रामीण बस्तियों में शिक्षा सुविधाओं; विद्यालयों में भौतिक एवं शैक्षिक सुविधाओं; शैक्षिक प्रोत्साबहन योजनाएं एवं लाभार्थी; शिक्षा का माध्यिम एवं पढ़ाई गई भाषाएँ; विद्यालयों में नामांकन विशेषत: अ.जा. एवं अ.ज.जाति, बालिकाओं और शैक्षिक रूप से पिछड़ा समुदाय; अध्यांपक और उनकी अकादमिक एवं शैक्षिक अर्हताएँ, पुस्तेकालय, प्रयोगशाला, सहायक स्टााफ और शिक्षा के + 2 स्तकर पर विषय-वार नामांकन शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, इसमें गैर मान्य ताप्राप्त विद्यालयों में नामांकन एवं अध्यायपक, वैकल्पिक विद्यालय एवं एआईई केन्द्रर, संस्कृसत पाठशालाओं, मदरसे एवं मकतबे सहित प्राच्यि विद्यालय, नि:शक्त् बच्चों हेतु विशेष विद्यालय और पूर्व-प्राथमिक संस्थातन शामिल है।


संबद्ध संगठन


राष्ट्री य स्तधर पर तीन संगठन नामत: केन्द्री य मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी), राष्ट्री य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् (एनसीईआरटी) और राष्ट्रीवय सूचना केंद्र (एनआईसी) शामिल है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय इसके प्रभावी कार्य निष्पाादन हेतु सर्वेक्षण एवं प्रशासनिक सहयोग के लिए निधि प्रदान करता है। एनसीईआरटी ने सभी अकादमिक, सहायता, प्रबंधन एवं सर्वेक्षण प्रचालनों के समन्वाय और प्रचार-प्रसार के लिए रिपोर्टें तैयार करने का उत्तशरदायित्वए साझा किया है। एनआईसी सॉफ्टवेयर विकास, आंकड़ा प्रक्रियन और जिला, राज्य् तथा राष्ट्री य स्तयर पर परिणामों के सरणीयन सहित सर्वेक्षण के कम्यू रि टरीकरण के सभी पहलुओं का उत्तषरदायी है। इसके अतिरिक्ते निकनेट नेटवर्क सुविधा का सर्वेक्षण कार्यकलापों के तीव्र संचार एवं प्रबंधन हेतु उपयोग किया जाता है। राज्यस स्तणर पर सभी 35 राज्यष सरकारें तथा संघ राज्या - क्षेत्र के प्रशासन इस सर्वेक्षण के कार्य निष्पासदन में शामिल हैं।


सर्वेक्षण के उद्देश्यध


  • विभिन्नच जनसंख्याद स्तारों में बस्तियों के भीतर (अ.ज./अ.ज.जा. सहित) प्राथमिक, उच्चद प्राथमिक, माध्यंमिक और उच्चसतर माध्यसमिक स्त रों पर शिक्षा सुविधा की उपलब्ध ता का मूल्यांककन करना। यदि सुविधा बस्तीस के भीतर नहीं है तो कितनी दूरी पर उपलब्धर है, के बारे में सूचना एकत्रित करना।

  • मान्यिताप्राप्ति विद्यालयों में मूल सुविधाएँ जैसे भवन, कक्षाएँ, पीने का पानी, बिजली, पेशाबघर, शौचालय, विद्यार्थियों एवं अध्यानपकों हेतु फर्नीचर, प्रोत्सायहन योजनाएँ एवं लाभार्थी, विद्यार्थियों की चिकित्साा जाँच तथा टीकाकरण/संरोपण की उपलब्धरता का मूल्यांरकन।

  • मान्यिताप्राप्ति विद्यालयों के सभी स्तवरों पर कक्षावार नामांकन ज्ञात करना।

  • मान्यिताप्राप्ति विद्यालयों में सभी स्त रों पर नि:शक्त विद्यार्थियों (बच्चोंह) की संख्‍या ज्ञात करना।

  • माध्यिमिक तथा उच्चातर माध्यममिक विद्यालयों में विज्ञान प्रयोगशालाएँ एवं पुस्तहकालय, शारीरिक शिक्षा अध्या पकों, पुस्तमकाध्यंक्ष, मार्गदर्शन सलाहकार, शिक्षणेतर स्टांफ की उपलब्धकता ज्ञात करना।

  • विद्यालय के उच्चयतर माध्यतमिक स्तलर पर अकादमिक शाखा में विषयवार लैंगिक नामांकन और अर्हक अध्याेपकों की उपलब्धयता पता लगाना।

  • मान्यंताप्राप्त विद्यालयों में विभिन्न. विद्यालय स्तनरों पर अकादमिक एवं व्याअवसायिक अर्हताओं वाले अध्यापपकों (लैंगिक एवं अ.जा./अ.ज.जा./अ.पि.व./अन्यय के रूप में) की स्थिति का मूल्यांाकन करना।

  • पढाई जाने वाली भाषाओं तथा शिक्षा के माध्याम के रूप में प्रयुक्तर भाषाओं के संबंध में मान्यढताप्राप्ता विद्यालयों के वितरण का पता लगाना।

  • मान्याताप्राप्त विद्यालयों की प्राथमिक/उच्च प्राथमिक कक्षाओं में नामांकन तथा अध्यांपकों का पता लगाना।

  • शिक्षा गारंटी योजना तथा वैकल्पिक और नवाचारी शिक्षा (ईसीजी एवं एआईई) के अंतर्गत विद्यालयों/केंद्रों में नामांकन और अनुदेशकों की स्थिति का मूल्यांएकन करना।

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  • पूर्व-प्राथमिक विद्यालयों में बच्चोंु और अध्याकपकों की लैंगिक संख्याम का पता लगाना।

  • विशेष विद्यालयों में नि:शक्तचता-वार नामांकन, अध्यायपकों, संरचनात्मंक सुविधाओं, उपस्कारों और अनुदेशी सामग्री का पता लगाना।

  • प्रारंभिक शिक्षा का सार्वजनीकरण (यूईई) के संदर्भ में एकल आयु, नव प्रवेशकों, प्रोन्नपतों, पुनरावर्तों और उपस्थिति से कक्षा-वार नामांकन का अनुमान लगाना।

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