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एन. सी. ई. आर. टी

राष्ट्रीय साक्षरता केंद्र - प्रकोष्ठ

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सिफारिशों के अनुसार, राष्ट्रीय साक्षरता केंद्र (CNCL) के लिए प्रकोष्ठ का गठन एनसीईआरटी में मार्च 2021 में किया गया।यह ‘सभी के लिए शिक्षा’ (जिसे पूर्व में वयस्क शिक्षा कहा जाता था) को समर्पित है। इसका उद्देश्य बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान के साथ-साथ महत्वपूर्ण जीवन कौशलों के लिए मुद्रित एवं अमुद्रित दोनों प्रकार की सामग्री का विकास करना है।यह प्रकोष्ठ शिक्षा मंत्रालय की केंद्रीय प्रायोजित योजना – नव भारत साक्षरता कार्यक्रम जिसे लोकप्रिय रूप से उल्लास (ULLAS) के नाम से जाना जाता है के अनुरूप कार्य करता है। यह कार्यक्रम उन शिक्षार्थियों पर केंद्रित है जिनकी आयु 15 वर्ष या उससे अधिक है और जिन्हें स्वयं को शिक्षित करने का अवसर नहीं मिल सका।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी), 2020 ‘सभी के लिए शिक्षा’ के संदर्भ में पाँच प्रमुख क्षेत्रों की बात करती है, जैसे —बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान,महत्वपूर्ण जीवन कौशल,व्यावसायिक कौशल विकास,मूलभूत शिक्षा तथा निरंतर शिक्षा। यह प्रकोष्ठ वयस्क शिक्षार्थियों के लिए कार्य करता है और मुख्य रूप से दो प्रमुख क्षेत्रों — बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान तथा महत्वपूर्ण जीवन कौशल — पर ध्यान केंद्रित करता है। इसके अंतर्गत विभिन्न संसाधन सामग्री का विकास किया गया है, जैसे:ULLAS शीर्षक से चार खंडों में प्रवेशिका ,मार्गदर्शिका,वर्कशीट्स,मूल्यांकन सामग्री, प्रवेशिकाओं पर आधारित वीडियो कार्यक्रम,जीवन कौशल पर ऑडियो कार्यक्रम जैसे प्रचार-प्रसार सामग्री – जिंगल, वृत्तचित्र, फ्लायर्स, मोनोग्राम, सूचना पुस्तिका आदि।
यह प्रकोष्ठ, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में अनुशंसित सौ प्रतिशत साक्षरता प्राप्त करने के लक्ष्य की दिशा में कार्य करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है। इसी दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए, प्रकोष्ठ ने विभिन्न राज्यों के शिक्षकों, विशेषज्ञों एवं मास्टर प्रशिक्षकों के लिए अनेक कार्यशालाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया है, जिनमें सभी क्षेत्रों के लिए अभिविन्यास कार्यशालाएँ भी शामिल हैं।
इसी दिशा में, प्रकोष्ठ की दृष्टि यह है कि आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान तथा महत्वपूर्ण जीवन कौशल के लिए विभिन्न संसाधन सामग्री के विकास में विद्यमान विशेषज्ञता का समन्वय स्थापित किया जाए एवं उसे और अधिक विकसित किया जाए। साथ ही, यह प्रकोष्ठ व्यावसायिक कौशल विकास, मूलभूत शिक्षा तथा निरंतर शिक्षा जैसे अन्य क्षेत्रों को भी शामिल करने की योजना रखता है। नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन और प्रसार के लिए प्रकोष्ठ, राज्यों के साथ समन्वय करते हुए विस्तृत दिशा-निर्देश, पुस्तिका, ऑडियो-वीडियो कार्यक्रम, कहानियों की पुस्तकें, पोस्टर, पैम्फलेट, मोनोग्राफ आदि विकसित करने की योजना बना रहा है।

एन. सी. ई. आर. टी

नव भारत साक्षरता कार्यक्रम (उल्लास)

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सिफारिशों के अनुसार, भारत सरकार ने ‘नवभारत साक्षरता कार्यक्रम’ नामक एक केंद्रीय प्रायोजित योजना शुरू की, जिसे आमतौर पर "उल्लास के नाम से जाना जाता है। यह योजना वर्ष 2022 से 2027 तक पाँच वर्षों की अवधि के लिए लागू की गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य 15 वर्ष या उससे अधिक आयु के उन सभी वयस्कों को सशक्त बनाना है, जिन्हें औपचारिक शिक्षा प्राप्त करने का अवसर नहीं मिला, ताकि वे देश के विकास में योगदान दे सकें। यह योजना न केवल पाठकों को पढ़ने, लिखने और गणना की मूलभूत क्षमताएं प्राप्त करने में सहायक है, बल्कि उन्हें आवश्यक जीवन कौशलों की समझ से भी समृद्ध करती है और आजीवन शिक्षा को प्रोत्साहित करती है। यह योजना स्वयंसेवक आधारित (volunteerism) के रूप में कार्यान्वित की जा रही है, जो सामाजिक उत्तरदायित्व और कर्तव्यबोध की भावना को बढ़ावा देती है। इसके अतिरिक्त, शिक्षार्थियों को प्रोत्साहित किया जाता है कि वे DIKSHA पोर्टल पर "Education for All" वर्टिकल तथा ULLAS मोबाइल ऐप के माध्यम से क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध सामग्री तक अपनी पहुँच बनाएं।
‘उल्लास‘ शिक्षा और व्यक्तिगत विकास के मार्ग को प्रकाशमय करने वाली आशा की किरण के रूप में निरंतर कार्य कर रहा है। उल्लास का पाठ्यक्रम इस प्रकार से तैयार किया गया है कि वह शिक्षार्थियों की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखे, जिससे उनमें अपनत्व और गौरव की भावना विकसित हो सके। उल्लास में अनुभवात्मक शिक्षण को भी अपनाया गया है, जो स्वयंसेवी शिक्षकों के लिए शिक्षण प्रक्रिया को न केवल अधिक रुचिकर और सार्थक बनाता है, बल्कि शिक्षार्थियों के लिए भी व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करता है। इसके साथ ही, यह योजना शिक्षार्थियों और स्वयंसेवी शिक्षकों के प्रयासों को प्रमाणपत्रों के माध्यम से मान्यता देती है, जिससे निःसंदेह उनके आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और वे जीवन में निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होते हैं।
यह योजना केवल एक साक्षरता कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह एक आंदोलन है — एक उज्ज्वल भविष्य और सशक्त नागरिकों की दिशा में एक प्रेरक अभियान है। यह योजना विश्वास रखती हैं कि साक्षरता एक मौलिक अधिकार है और इस अधिकार को सभी तक पहुँचाने का निरंतर प्रयास करती है। इस यात्रा पर निकलने वाले शिक्षार्थी न केवल पढ़ना और लिखना सीखते हैं, बल्कि वे अपने जीवन, आजीविका और समुदायों में भी एक महत्वपूर्ण परिवर्तन लाने में सक्षम बनते हैं। पढ़ा गया प्रत्येक शब्द, गणना किया गया प्रत्येक अंक और समझा गया प्रत्येक विचार उन्हें उनके सपनों के एक कदम और करीब ले जाता है और भविष्य में भी ऐसा ही करता रहेगा।

Definition of Literacy

The National Education Policy (NEP) 2020, a landmark reform in India’s educational landscape, recognizes the prominent role of literacy in the development of the country. The NEP 2020 aligns with the United Nations' Sustainable Development Goals (SDGs), particularly SDG 4, which focuses on Quality Education. It emphasizes quality education for all in the country, addressing disparities, promoting inclusivity, and recognizing the importance of lifelong learning. While talking of Education for All in para 21, the policy states that ‘strong and innovative government initiatives for adult education - in particular, to facilitate community involvement and the smooth and beneficial integration of technology - will be affected as soon as possible to expedite this all-important aim of achieving 100% literacy’ (para 21.4).
In this context, it becomes essential to define ‘literacy’ and ‘100 percent literacy’, in alignment with NEP 2020, under the centrally sponsored scheme, ULLAS – Nav Bharat Saaksharta Karyakram, working towards the goal of ‘Education for All’ across the country. Additionally, it also necessitates the formulation of a clear definition for what may be understood as the criteria for a State/Union Territory to be declared ‘fully literate.’
This fundamental step is crucial to achieving the goal of full literacy under ULLAS, enabling targeted interventions and effective monitoring, thereby fostering socio-economic development of the country.

The Definition of Literacy has been translated and adapted into various Regional Languages throughout the country.

संसाधन

मूलभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता

साक्षरता केवल पढ़ने और लिखने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के साथ सार्थक जुड़ाव का एक प्रभावी माध्यम भी है, जो न केवल आर्थिक विकास बल्कि व्यक्ति और समुदाय की भलाई के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।आधारभूत साक्षरता से तात्पर्य है पढ़ने, बोलने, लिखने और अपने विचारों को समझने एवं अभिव्यक्त करने से जुड़ी क्षमताएँ। इसी प्रकार, संख्यात्मक साक्षरता का अर्थ है जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसे मूलभूत गणितीय कार्यों को करने की क्षमता। ये दोनों ही क्षमताएँ लोगों को सशक्त बनाने और उनके जीवन को बेहतर बनाने के लिए समान रूप से आवश्यक हैं।

महत्वपूर्ण जीवन कौशल

महत्वपूर्ण जीवन कौशल वे आवश्यक क्षमताएँ हैं जो किसी व्यक्ति को दैनिक जीवन की चुनौतियों का प्रभावी रूप से सामना करने और जीवन में सफलता प्राप्त करने में सक्षम बनाती हैं। इनमें कई महत्वपूर्ण कौशल शामिल होते हैं,जैसे : वित्तीय साक्षरता,कानूनी साक्षरता,डिजिटल साक्षरता, पर्यावरणीय साक्षरता,आपदा प्रबंधन, व्यावसायिक कौशल,बच्चों की देखभाल और शिक्षा,स्वास्थ्य और पारिवारिक कल्याण, प्रभावी अभिभावकत्व, प्राथमिक उपचार,सड़क यातायात का प्रबंधन एवं मतदाता पंजीकरण जैसे महत्वपूर्ण फॉर्म और दस्तावेज़ भरना और भी अनेक उपयोगी जीवनोपयोगी कौशल शामिल हैं।

व्यावसायिक कौशल विकास

व्यावसायिक शिक्षा वयस्क नव-साक्षरों के लिए कौशल विकास प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर रोज़गार प्राप्त करना, फिर से कौशल अर्जित करना (Reskilling) और कौशल उन्नयन (Upskilling) करना है।यह शिक्षा इस प्रकार डिज़ाइन की गई है कि शिक्षार्थी किसी विशेष व्यवसाय, शिल्प या व्यवसायों की एक श्रेणी से संबंधित विशिष्ट ज्ञान, कौशल और दक्षताएँ प्राप्त कर सकें ताकि वे जीवन में प्रगति कर सकें।यह उन्हें आत्मनिर्भर बनने, बेहतर आजीविका प्राप्त करने और समाज में सार्थक योगदान देने में सक्षम बनाती है।

मूलभूत शिक्षा

ULLAS (नव भारत साक्षरता कार्यक्रम) के संदर्भ में बेसिक एजुकेशन (Basic Education) का तात्पर्य देश में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के शिक्षार्थियों की अनौपचारिक शिक्षा से है।यह तीन चरणों के समकक्षता को दर्शाता है:प्रारंभिक चरण (कक्षा III से V),मध्य चरण (कक्षा VI से VIII) और माध्यमिक चरण (कक्षा IX से XII)। इस समकक्षता शिक्षा को NCERT/SCERTs और NIOS/SIOS के बीच सहयोगात्मक तरीके से लागू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्रौढ़ शिक्षार्थियों को औपचारिक शिक्षा के स्तर तक पहुंचाना और उन्हें सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक रूप से सशक्त बनाना है।

निरंतर शिक्षा

निरंतर शिक्षा, जिसे आजीवन शिक्षण के नाम से भी जाना जाता है, इसमें वयस्कों के लिए कला, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, संस्कृति, खेल, मनोरंजन तथा अन्य किसी भी विषय, रुचि, शौक, हस्तकला या कौशल से संबंधित समग्र और रुचिकर पाठ्यक्रम शामिल होते हैं। यह माध्यमिक शिक्षा के बाद की ऐसी शिक्षण गतिविधियों को सम्मिलित करता है जो शिक्षार्थियों को उनके रुचिकर क्षेत्रों का ज्ञान अपने जीवन के किसी भी चरण में प्राप्त करने की लचीलापन प्रदान करती हैं।

प्रदर्शित सामग्री

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