Page 38 - हिन्दी प्रशस्त 14 दिसम्बर
P. 38

क्या इस विद्यािी क े पेट में ज़्यािातर समय सूजन रहती है?
           3.

                  इस विद्यािी को अक्सर
           4.
                  (ए) बुखार रहता है?
                  (बी) संरमि रहता है?




           5.*    क्या इस विद्यािी की त्िचा या नाख़ून पीले हैं ?

           6.     क्या यह विद्यािी ज़्यािातर िका हुआ या कमज़ोरी महसूस करता है?

           7.     क्या इस विद्यािी क े पैरों में छाले हैं?


        20. बहु-विवयांगता
                                                                                                                य
                                   य
                                                                                                        े
               बहु-विवयांगता  (उपयुि  कोई  एक  या  एक  से  अविक  विवनवियष्ट  विवयांगताए)  वजसक  अंतगत
        बविरता,अन्िता,वजससे ऐसी ििा वजसमें वकसी वयवि क े श्रवय और दृश्य क े सवममवलत ह्रास  क े कारि गंभीर समप्रेषि,
        विकास और विक्षि संबंिी गंभीर ििाएं अवभप्रेत है |  (आर.पी.डब्ल्यू.डी. 2016)।

               इस िब्लिािली का प्रयोग  ऐसे वयवि  क े  वलए वकया जाता है  वजसे िारीररक,  मनोिैज्ञावनक या इंवद्रयात्मक
                                               ाँ
        (भािनाओं या अंगों से समबंवित–िेखना, सूघना, सुनना इत्यावि) स्तर पर कई विवयांगताएाँ हैं|  विद्याविययों में िो अििा
                                      ाँ
                       ाँ
                                                                                                     े
                                                                                                                 ाँ
                                                                                                े
        अविक बीमाररया अििा वस्िवतया जैसे वक मानवसक मंिता मवस्तष्ट्क में चोट, अवस्ि जवटलता, िेखन सुनन की चुनौवतया,
        संज्ञानात्मक और आनुिंविक मुद्दे  हो सकतें है | इन  विद्याविययों को कोई कौिल/ जानकारी प्राप्त करने में, विमाग में जानकारी
        िजय करने में और आिश्यकता पड़ने पर इसे लागू करने में अत्यविक कवठनाई हो सकती है | बहु-विवयांगताओं क े कई
                                                                                       ाँ
                                                                                            े
        सामान्य लक्षिों में िावमल है –बावित भाषि और संिाि कौिल,गवतिीलता में चुनौवतया, संििनाओं में कमी,िारीररक
        विकृवत और रोज़मराय की गवतविवियों को करने में सहायता की आिश्यकता है।

             ें
        21. कद्र सरकार द्वारा अवधसूवचत की जा सकन िाली कोई अन्य श्रणी
                                                                        े
                                                     े
                                                                                          ें
           यह संवििान क े प्राििान का विषय है। इसमें कोई अन्य विवयांगता िावमल होगी, जब भी कद्र सरकार द्वारा अविसूवचत
        वकया जाता है | (आर.पी.डब्ल्यू.डी. 2016)।
































                         34
   33   34   35   36   37   38   39   40   41   42   43