Page 36 - हिन्दी प्रशस्त 14 दिसम्बर
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               पावकसन रोग से कोई तंवत्रका प्रिाली का प्रगामी रोग अवभप्रेत है, जो कमपन, पेिी कठोरता और िीमा,  कवठन
        संचालन द्वारा वचन्हांवकत होता है जो मुख्यत: मवस्तष्ट्क क े आिारीय गंवडका क े अिपतन तिा तंवत्रका संचालन डोपामई
        क े ह्रास  से समबद्य मध्य आयु और िृधॎध वयवियों  को प्रभावित करता है। (आर.पी.डब्ल्यू.डी. 2016)

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                                                                                       ाँ
        पावकसन की पहचान आमतौर पर 40 िषय से अविक आयु क े लोगों  में की  जाती है। हालावक, 21-40 िषय क े आयु समूह
                                                                                                          य
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        में भी पावकसन क े लक्षि कभी कभार िेखे गए है। 21 िषय से कम आयु क े लोगों में पावकसन का  पाया जाना िुलभ ही है।
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                                                                                         े
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        वकिोरािस्िा में पावकसन की पहचान करना बहि मुवश्कल है क्योंवक इस आयु िगय में इसक लक्षि की अवभवयवि की
                                                                                              िं
        वििेषताएाँ सरलता से विखाई  नहीं िेती है और इनमें एकरसता भी नहीं होती  है। वकिोरािस्िा पावकसन का असर अक्सर
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        िरीर क े वनचल वहस्सों जैसे टांगो में गैर लचीलेपन अििा डायस्टोवनया क े ऱूप में विखाई िेता है। ज्यािातर मामलों  में
                                                          े
                                                                                                          े
        कपकपाहट या झटकों  का पूियतया अभाि होता है। चलत समय अििा आराम करते समय टांगो या पैरों में झटक महसूस
        हो सकते है, लेवकन क ं पन नहीं। बहुत बार ििय महसूस होना, वचवकत्सकीय वयिहारों का पहला लक्षि हो सकता है।
               पावकसन रोग क े िुरुआती लक्षि वनमनवलवखत हैं जो बच्चों में िेखे जा सकते हैं, वजन्हें  जीिन में आगे चल कर
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        पावकसन क े संकत क े ऱूप में माना जा सकता है।
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                                           िं
        तावलका-17 : विविष्ट चेकवलस्ट : पावकसन रोग
            क्र.सं.
                                    विवयांगता की वस्थवत                             विद्याथी का क्रमांक

                  क्या इस विद्यािी की वलखािट संकरी और छोटी है?
           1.


           2.*    क्या इस विद्यािी को क ं पन अििा झटक लगत हैं,  जो अक्सर हाि या
                                                      े
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                  उंगली या टांगों से िुऱू होते है?
                                                     रि विकार


                                                                                   ें
                            इस खंड में रि या रि विकारों क े कारि होन िाली विवयांगताय िावमल हैं।
                                                                   े
        17. हमोफीवलया
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               हेमोफीवलया से एक अनुिांिकीय रोग अवभप्रेत है जो प्रायिः पुरुषो को ही प्रभावित करता है वकन्तु इसे मवहला द्वारा

        अपने नर बालकों को संचाररत वकया जाता है, इसकी वििेषता रि क े िक्का जमने की सािारि क्षमता का नुकसान होना
        है वजससे छोट से घाि का पररिाम भी घातक रिस्राि हो सकता है |  (आर.पी.डब्ल्यू.डी. 2016)
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        तावलका-18 : विविष्ट चकवलस्ट : हमोवफवलया
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                                े

           क्र.सं.                  विवयांगता की वस्थवत                          विद्याथी का क्रमांक



                  क्या इस विद्यािी क े वकसी अंग में कटने या खरोंच क े बाि अत्यविक और
           1.*
                  अकारि रिस्राि होता है?
                  क्या इस विद्यािी को कई बड़ या गहर घाि हैं?
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           2.
           3.     क्या यह विद्यािी बहुत सुस्त विखाई िेता  है?

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                  क्या यह विद्यािी िियनाक और लंब समय तक होने िाले वसरििय की
           4.
                  विकायत करता है?





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