Page 5 - हिन्दी प्रशस्त 14 दिसम्बर
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आमुख


               वन:िि जन अविवनयम 1995, की जगह 2016 में विवयांगजन अविकार अविवनयम लाया गया, जो विवयांगता


        क े 21 प्रकारों को मान्यता िेता है। नई जोड़ी गई विवयांगता की वस्िवतयों जैसे विविष्ट अविगम अक्षमता, मानवसक बीमारी,
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        बौवधॎधक अक्षमता, और स्िलीनता (ऑवटज़्म) क े बार में आम-जन में ज्यािा जानकारी नहीं होन क े कारि यह अक्सर अज्ञात
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        और उपेवक्षत रह जाती हैं। सरकारी सुवििाओं का लाभ उठान से पहले वििेष आिश्यकता िाले बच्चों की प्रारंवभक पहचान
        और प्रमािीकरि करना आिश्यक है।

               विद्यालयी स्तर पर 21 प्रकार की विवयांगता वस्िवतयों की आरंवभक जााँच क े बाि सूचीबधॎध करने में वििेष विक्षकों
        की सहायता करने क े उद्देश्य से वििेष आिश्यकता समूह विक्षा विभाग (डी.ई.जी.एस.एन.) एन.सी.ई.आर.टी. में 2019 में

        प्रिस्त का वनमायि  आरंभ हुआ। प्रिस्त की सहायता से विद्यालयी स्तर पर सूचीबधॎध विवयांगताओं को उवचत आकलन

        एिं प्रमािन क े वलए उच्च अविकाररयों क े साि साझा करना आिश्यक है। प्रिस्त पर कायय जारी रहा और इसे अंवतम
        स्िऱूप सी.आई.ई.टी. में विया गया।

        प्रिस्त 2 भागों में बाँटा  है। प्रिस्त भाग-1 सभी छात्रों की कक्षािार प्रिम स्तर की प्रारंवभक जााँच  हेतु सामान्य  विक्षकों क े
        उपयोग क े वलए है।

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               प्रिस्त भाग-2 वििेष विक्षकों द्वारा उपयोग क े वलए है तावक िह भाग -1 की  वटप्पवियों पर अपना मत िे सक और
        स्क ू ल स्तर पर जााँच, और आिश्यक जानकारी क े संकलन क े बाि विवयांगता की उवचत  पहचान और प्रमािीकरि क े
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        वलए, आगे मू्यांकन विविरों में भेज सक।
        प्रिस्त क े विकास की प्रवरया की िुऱूआत 21 प्रकार की विवयांगता वस्िवतयों से समबवन्ित उपलब्लि सावहत्य की समीक्षा
                                             ें
        करने और भारत क े विवभन्न राज्यों और कद्र िावसत प्रिेिों (यू.टी.) मे विवयांगता वस्िवतयों की पहचान में अपनाई जान  े
        िाली प्रवरया क े एक सिेक्षि से हुई।
               पररयोजना िल ने 21   विवयांगता प्रकारों क े वलए प्रिस्त का प्रारुप तैयार वकया िा। प्रिस्त क े इस प्रारुप को 3

                                                                        ें
        वििसीय काययिाला में विवयांगता से समबवन्ित वििेषज्ञों, राज्यों और कद्र िावसत प्रिेिों में काम करने िाले समािेिी
        विक्षा समन्ियकों, वििेष विक्षकों और सामान्य विक्षकों ने सवरय विचार-विमिय क े बाि अंवतम ऱूप विया है।

        इस प्रकार से तैयार ‘प्रिस्त’ का परीक्षि कनायटक, मेघालय और ओवडिा राज्यों क े उन चयवनत ब्ललॉकों में वकया गया िा,

        जहााँ सबंवित क्षेत्रीय विक्षा संस्िान (आर.आई.ई) वििेष ध्यान िे रहे हैं। प्रिस्त का परीक्षि वि्ली क े चयवनत स्क ू लों में
        भी वकया गया िा।

        प्रिस्त, समग्र वििेषज्ञता िाल विवभन्न वयवियों और साियजवनक संस्िानों क े सामूवहक प्रयासों और समपयि का फल है।
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        प्रिस्त सामान्य विक्षकों, वििेष विक्षकों, संसािन वयवियों और प्रिानाचायों या स्क ू ल प्रमुखों क े उपयोग क े वलए बना है।
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        प्रिस्त उन विद्याविययों  की समयोवचत जााँच की सुवििा प्रिान करगा, वजनकी विक्षा वकसी भी प्रकार की विवयांगता से
        बावित हो सकती है, पररिामस्िऱूप समािेिी विक्षा गुिित्ता िृवधॎध में सहायता  होगी।
                                                                                                         डॉ. भारती

                                                                                         े
                                                                            एसोवसएट प्रोफसर, डीआईसीटी और टीडी
                                                                                     ें
                                                                                    कद्रीय िैवक्षक प्रौद्योवगकी संस्िान
                                                                       राष्ट्रीय िैवक्षक अनुसंिान और  प्रविक्षि पररषि्
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