Page 10 - हिन्दी प्रशस्त 14 दिसम्बर
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        में अक्षमता वस्िवतयों को पहचानने में कोई कवठनाई नहीं आ रही है, िहां पर वििेष आिश्यकता िाल बच्चों की पहचान
        प्रवरया में वििेष विक्षकों अििा वचवकत्सा वििेषज्ञों (डॉक्टर) को िावमल वकया गया है। लगभग 76.4% राज्यों ने वििेष
        आिश्यकता िाले बच्चों की पहचान की प्रवरया में सामान्य विक्षकों और वििेष विक्षकों को िावमल वकया िा। सामान्य

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        विक्षकों को पहचान प्रवरया में सवममवलत नहीं करने का प्रमुख कारि िा, उनमें विवभन्न अक्षमता वस्िवतयों क े बार में
        जागऱूकता और ज्ञान का अभाि।

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               8  राज्यों  वसवक्कम,  तवमलनाडु,  करल,  असम,  छत्तीसगढ़,  पुडुचरी,  वि्ली  और  उत्तर  प्रिेि  द्वारा  वििेष
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        आिश्यकता िाल बच्चों की पहचान क े वलए  जााँच सूची वनमायि का कायय या तो पूरा कर वलया गया है या  अवन्तम अिस्िा
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                                                                                                             य
        में है। इसक अलािा उत्तराखंड और जममू एिं कश्मीर में वििेष आिश्यकता िाले बच्चों की सूची वनमायि का काय चल
        रहा है। पहचान और  जााँच उपकरिों का अभाि सी.डब्ल्यू.एस.एन. की समयोवचत और उवचत पहचान में बािा उत्पन्न
        करता है।

               विवयांग बच्चों की प्रारंवभक पहचान में विक्षकों की सहायता हेतु सी.आई.ई.टी.- एन.सी.ई.आर.टी. क े द्वारा  प्रिस्त

        का  वनमायि वकया गया है। प्रिस्त का भाग-1 सभी विद्यालय क े सभी बच्चों की प्रारवमभक  जााँच क े वलए है तावक विवयांगता
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        का पूि आकलन वकया जा सक। प्रिस्त क े भाग -1 और भाग-2 क े पररिाम किल  प्रारंवभक चरि हैं, जो अवग्रम वनिान
        प्रवरया में सहायक हैं। प्रारंवभक  जााँच विवयांग बच्चों क े वलए उपयुि िैवक्षक हस्तक्षेप सुवनवित करती है।


        विक्षक और प्रिस्त


               प्रिस्त को सामान्य विक्षकों  क े उपयोग हेतु बनाया गया है क्योंवक िे विद्यािी क े साि अविकतम समय वबताते

        हैं। बच्चों क े विकास एिं िृवधॎध में सवममवलत वहतिारकों में से विक्षकों का एक वििेष स्िान है। विक्षि-अविगम प्रवकया क े
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        िौरान, विक्षक बच्चे को विवभन्न पररवस्िवतयों में िेखते हैं, जैसे वक कक्षा, खेल का मैिान, सहपाठ्यचया-गवतविवियां,
        संगीत, कला और वि्प, इत्यावि। कोई भी ऐसा बच्चा वजसका विकास स्िीकृत मापिंडों क े अनुसार नही हो रहा है उसे
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        विक्षक सरलता से पहचान कर अवतररि वनिान हेतु भज सकते हैं। इसक अलािा अवभभािकों से उवचत जानकारी पान क े
        वलए भी विक्षक  एक विश्वसनीय समपक सूत्र है।
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        प्रिस्त क्या है?



              विद्यालयी छात्रों की विवयांगता प्रमािन को सुगम बनाने हेतु प्रिस्त को िो भागों में विभावजत वकया गया है-

        सामान्य विक्षकों द्वारा प्रिम चरि पर  जााँच हेतु प्रिस्त भाग-1 है। इसमें िस्तुवनसॎठ प्रकार क े प्रश्न हैं, वजनका  उत्तर हााँ या नहीं
        में विया जाना है।

               वद्वतीय चरि की  जााँच और विवयांगजन अविकार अविवनयम 2016 में पहचानी गयी,  21 प्रकार की विवयांगता

        क े अनुसार  विद्यालय में पायी जाने िाली विवयांगताओं को सूचीबधॎध करने क े वलए वििेष विक्षकों/परामिय िाताओं/स्क ू ल

        प्रमुखों क े उपयोग हेतु प्रिस्त भाग -2 है। विवयांगताओं क े प्रमािन एिं पक्की पहचान को सुगम बनाने क े वलए वद्वतीय  चरि

        क े पररिाम स्िऱूप सभी बच्चों क े एकवत्रत आंकड़ों को विद्यालय प्रमुख को सौंपा जाएगा।

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               प्रिस्त को बनाते हुए इस बात का ध्यान रखा गया है वक इसकी भाषा सरल,स्पष्ट एिं उपयोगकता क े वलए सहज हो
        तिा विवयांगजन अविकार अविवनयम 2016 में िवियत 21 प्रकार की विवयांगताओं क े वयिहाररक लक्षिों को भी प्रस्तुत
        वकया जा सक।
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