Page 9 - हिन्दी प्रशस्त 14 दिसम्बर
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प्रिस्त क्यों?


              विवयांगता एक जवटल और बहुआयामी अििारिा है। विवयांगता की अििारिा और अिय कानूनी, राजनीवतक और

        सामावजक संिभों  क े अनुऱूप बिल जाता है। इसे आमतौर पर िारीररक या मानवसक या ऐसी िोनों वस्िवतयों क े ऱूप में िेखा
                                                                                             य
        जाता है, जो वकसी वयवि की गवतविवियों और इंवद्रय बोि को सीवमत करती हैं। समावजक पूिाग्रहों क े कारि विवयांग
        वयवियों को बहुत अविक भेिभाि का सामना करना पड़ता है। भेिभाि का सबसे मावमयक क्षेत्र, “विक्षा” है। विवयांगता

        अक्सर ला-इलाज होती है, हालांवक िुरुआती पहचान और हस्तक्षेप से क ु िल प्रबंिन आसान हो जाता है, पररिाम स्िऱूप
        वस्िवत में अवतररि िुष्ट्प्रभाि को रोका जा सकता है।

              भारत में, विवयांगजन अविकार अविवनयम 2016 (आर.पी.डब्ल्यू.डी.) विवयांगता क े 21 प्रकारों को मान्यता िेता
                                                                                   े
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        है। इसन विवयांग वयवि अविवनयम 1995 (पी.डब्ल्यू.डी.) की जगह ले ली है, वजसमें किल 7 प्रकार की विवयांगताओं को
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        मान्यता िी गई िी। यह विवयांग वयवियों क े अविकारों की संयुि राष्ट्र संस्तुवत (यू.एन.सी.आर.पी.डी.) क े अनुऱूप है। इसक
                                                                                    े
        अलािा यह एक कानूनी ढांचा प्रिान करता है, विवयांग वयवियों क े अविकारों क े बार में जागऱूकता पैिा करता है और
        समतामूलक समािेिन को बढ़ािा िेता है।

               विक्षा का अविकार अविवनयम  (आर.टी.ई.) 2009, वििेष आिश्यकता िाले बच्चों (सी.डब्ल्यू.एस.एन.) सवहत
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        सभी बच्चों को मुफ्त और अवनिाय विक्षा सुवनवित करता है। विद्यालयों क े संिभ में, आर.पी.डब्ल्यू.डी. अविवनयम 2016
        और आर.टी.ई. अविवनयम 2009 क े प्राििानों का तात्पयय है वक सभी विवयांग बच्चों की ज्ि से ज्ि पहचान की जानी
                                                                                                             े
        चावहए, तावक विवयांगता क े कारि उत्पन्न होने िाली उनकी वििेष जऱूरतों को उवचत ऱूप से संबोवित वकया जा सक और
        उन्हें उनकी आिश्यकतानुसार उवचत सहयोग विया जाना  चावहए, वजससे िह समाज में अपनी पूिय क्षमतानुसार कायय कर

        सक। आििय ऱूप से विवयांग बच्चों की पहचान की प्रवरया जन्म क े समय से ही िुऱू हो जानी चावहए।
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               हालावक िेि भर क े विद्यालयों की जमीनी िास्तविकता, ऐसे पयायप्त उिाहरि प्रिान करती है, जो ििायते हैं वक विद्यालयी
                                                                                                            े
        कमयचाररयों एिं सामान्य जन में जानकारी क े अभाि क े कारि विद्यालय में िावखला लेने क े बाि भी विवयांगता िाल बच्चे
        पहचान से िंवचत रह जाते हैं। यह मुख्यत: विवयांगता क े उन प्रकारों क े साि होता है, जहााँ लक्षि या  तो पूरी तरह से विखाई
        नहीं िेते हैं अििा इस प्रकार क े होते हैं वक अवभभािक एिं विक्षक सरलता से इनकी पहचान नहीं कर पाते हैं।
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              आर.पी.डब्ल्यू.डी. अविवनयम 2016 द्वारा मान्यता प्राप्त विवयांगता की वस्िवत, जैसे वक िारीररक चुनौवतया, एवसड
        अटक, या बौनापन की पहचान करना आसान है, लेवकन मानवसक बीमारी, विविष्ट अविगम अक्षमता, श्रिि िोष            या
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        स्िलीनता जैसी अक्षमताओं को उवचत प्रविक्षि क े वबना पहचानना तुलनात्मक ऱूप से कवठन और जवटल है।

              यह कहने की आिश्यकता नहीं है वक विवयांगता की वस्िवतयों की िीघ्र और उवचत पहचान से ही समयोवचत
        आिश्यक िैवक्षक हस्तक्षेप कायायन्ियन का  मागय सरल हो जाता  है। इससे विवयांग बच्चों क े जीिन में साियक बिलाि

        लाया जा सकता है। समािेिी िैवक्षक वयिस्िा में ज्ि से ज्ि लागू आिश्यकता आिाररत हस्तक्षेप, बच्चों को
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        आत्मविश्वास और आत्म सममान क े साि बढ़ने में मिि  करते हैं। पररिाम स्िऱूप विवयांगता िाल बच्चे समाज क े साि
        साियक ऱूप से  जुड़ सकते हैं।

                विवयांगता की वस्िवतयों की पहचान एिं आरंवभक  जााँच में अपनाए गए तौर तरीकों से समबवन्ित चुनौवतयों क े बार  े
        में जानने एिं समझने क े वलए पररयोजना िल ने िषय 2019  में एक सिेक्षि वकया और सिेक्षि में वनमनवलवखत तथ्य सामने
                                                                     े
        आए वक 52.9% राज्यों को क ु छ विवयांगताओं क े लक्षिों अििा वििषताओं को समझने में कवठनाई हो रही है। अविकांि
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        राज्यों ने बताया वक क ु छ अक्षमताओं से समबवन्ित चुनौवतया आ रही हैं। जैसे: मानवसक बीमारी, िािी और भाषा अक्षमता,
        अविगम अक्षमता, पावकसन रोग, हीमोवफवलया और िैलेसीवमया। राज्यों से वमल उत्तरों से यह पता चला वक वजन राज्यों
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