Page 32 - हिन्दी प्रशस्त 14 दिसम्बर
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क्या इस विद्यािी को कई बार समझाने क े बािजूि भी वलवखत अवभवयवि
6.*
क े िौरान वयाकरि, विराम वचह्न या िब्लिों क े चयन से िाक्य संरचना
समबंवित कवठनाई होती है?
7. क्या यह विद्यािी वकसी विषय पर अ्प समय तक ही ध्यान कवन्द्रत कर
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पाता है अििा आिे घंट या उससे अविक िेर तक वकसी काम में मन नहीं
लगा पाता है?
8. क्या इस विद्यािी को समय की अििारिा समझने में कवठनाई होती है और
यह अक्सर समझ नहीं पाता है वक विए हुए कायय को करने में वकतना समय
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लगेगा अििा उसे कसे वयिवस्ित करना है, तावक काम समय सीमा क े
अंिर पूरा हो जाए?
9.* क्या यह विद्यािी वनिेिों का पालन करने में असमिय है?
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10.* क्या यह विद्यािी वलखत समय अक्सर अक्षरों या प्रतीकों को उलटा बना
िेता है, उिाहरि क े वलए- “p” क े बजाय “q” वलखना या “b d ,u/v ,
/
w/m,” या च/ज, फ/प, ि/ब, घ/ि, प/त, या +/X,÷/- आवि।
13. स्िपरायणता स्पक्रम विकार (ऑवटज्म स्पक्रम वडसऑडर / स्िलीनता)
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स्िपरायिता स्पेक्रम विकार से एक ऐसी तंवत्रका विकास की वस्िवत अवभप्रेत है जो विविष्टता: जीिन क े पहल े
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तीन िषय में उत्पन्न होती है, जो वयवि की समपक करने की, समबन्िों को समझने की और िूसरों से समबवन्ित होन की क्षमता
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या योग्यता को प्रभावित करती है और आमतौर पर यह अप्रावयक या वघसे- वपट कमयकाण्डों या वयिहार से सहबधॎध होता है।
(आर.पी.डब्ल्यू.डी. 2016).
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तावलका-14 : विविष्ट चकवलस्ट : . स्िपरायणता स्पक्रम विकार (ऑवटज्म स्पक्रम वडसऑडर)
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क्र.सं.
विवयांगता की वस्थवत विद्याथी का क्रमांक
1.* क्या इस विद्यािी को बोलने (ििा) िाले की ओर िेखने या उससे नजर ें
वमलाने से कवठनाई होती है?
2. क्या यह विद्यािी िब्लिों को प्रवतध्िवनत या िब्लिों को िोहराता है? उिाहरि
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क े वलए, यह पूछ जाने पर वक ‘आपका नाम क्या है?’ विद्यािी अपना नाम
बताने क े स्िान पर ििा क े िाक्य को ही िोहराएगा वक आपका नाम क्या है?
3.
क्या इस विद्यािी को सावियों क े समूह/ सहपावठयों क े साि खेलने/बातचीत
करने/िोस्त बनाने में कवठनाई होती है?
क्या यह विद्यािी अपनी ही िुवनया में खोया हुआ प्रतीत होता है?
4.
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