Page 22 - हिन्दी प्रशस्त 14 दिसम्बर
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प्रिस्त भाग-2

                                                िारीररक विवयांगता

                                                    े
                                                                                          य
        िारीररक विवयांगता िारीररक विकृवतयों या विच्छिन क े कारि होने िाली अक्षमता को संिवभत करती है और यह वयवि
            क े िारीररक कामकाज, गवतिीलता, सहनिवि या िारीररक वरयाओं को करने की क्षमता को सीवमत करती है।
           1. गवतविषयक  विवयांगता

             सुवनवित गवतविवियों को करने में वकसी वयवि की असमियता जो स्िंय और िस्तुओं  की गवतिीलता से सहबधॎध
           है वजसका पररिाम पिीक ं काल और तंवत्रका प्रिाली या िोनों में पीड़ा है। (आर.पी.डब्ल्यू.डी. 2016)।
                              े
                            े
        तावलका 3 विविष्ट चकवलस्ट: गवतविषयक विवयांगता
           र.सं.                      विवयांगता की वस्िवत                            विद्यािी का रमांक

                                                                        े
           1.    क्या इस विद्यािी को चलने में कवठनाई होती है या चलने क े वलए सहार की
                 ज़ऱूरत  होती है?


           2.    क्या इस विद्यािी को िरीर क े वकसी वहस्से का  उपयोग करने या वहलाने में
                 कवठनाई होती है?

                                                        े
           3.*   क्या इस विद्यािी क े िरीर क े वकसी अंग को विच्छवित वकया गया है
                 (जैसे वक ि्य वरया द्वारा अंग को हटाना) ?

           4.    क्या यह विद्यािी अचानक अनैवच्छक झटकों अििा हरकतों क े साि
                 चलता है?
           5.*  क्या यह विद्यािी वनमन में से वकसी का चलने-वफरने क े वलए उपयोग करता है?

                (ए) बैसाखी
                (बी) सहायक सामग्री
                (सी) उपकरिों
                 (डी) पवहया कुसी (वहीलचेयर)

           6.*  क्या इस विद्यािी क े िरीर अििा िरीर क े वकसी अंग में िेखकर पहचानी जा
                सकने िाली कोई विकृवत या विकार है?

                (ए) गियन
                (बी) हाि
                (सी) उंगली
                (डी) कमर
                 (ई) पैर

           2. क ु सॎठ रोगमुक्त वयवक्त:
               क ु सॎठ रोग मुि वयवि का अिय है िह वयवि जो क ु सॎठ से रोगमुि हो गया है, वकन्तु वनमनवलवखत से पीवड़त है-

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        हािों या पैरों में संििना की हावन क े साि-साि आाँख और पलक में संििना और पैरवसस की हावन, लेवकन कोई प्रकट
                                                           े
        विकृवत नहीं; वयि विकृवत और आंविक घात वकन्तु उनक हािों और पैरों में पयायप्त गवतिीलता होने क े कारि िे सामान्य
                                     े
        वयािसावयक वरयाकलापों में लग रहने क े वलए सक्षम है ; अत्यंत िारीररक विकृवत क े साि बधॎध  जो उसे कोई भी लाभकारी
        वयिसाय करने से रोकती है और “क ु सॎठ रोगमुि वयवि ” पि का तिनुसार अिय लगाया जाएगा; (आर.पी.डब्ल्यू.डी. 2016)





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