Page 26 - हिन्दी प्रशस्त 14 दिसम्बर
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        भर में असामावजक लोगों द्वारा इस्तेमाल वकए जाने िाले एक अवनयंवत्रत हवियार में बिल गया है। एवसड अटक क े पीवड़तों
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        को क ु छ उवचत कारिों जैसे वक िजयनाओं, सामावजक कलंक, कम आत्मसममान और हमल की घटना क े बाि िरीर पर
        जीिन भर क े वलए रह गए स्िायी वनिानों की िजह से, तेज़ाबी हमल से प्रभावित कहना ही सियिा उपयुि होगा।
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               अकले भारत में हर साल लगभग 200 से 300 मामले सामन आते हैं,इसक बािजूि भी बड़ी संख्या में घटनाएं िजय
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        नहीं होती हैं। इसक पररिामस्िऱूप पीवड़त भािनात्मक, मानवसक, िारीररक, सामावजक ऱूप से कष्ट भोगते हैं और उन्हें इस
                                                                                          े
        गहन पीड़ा से बाहर वनकलने क े वलए बहुत ज्यािा सहयोग की आिश्यकता होती है। उन्हें उनक विविष्ट ऱूप जैसे िरीर पर
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        जलन क े वनिानों,गंभीर जलन और िरीर में विकृवत से आसानी से पहचाना जा सकता है। सिि कानूनी प्रवरयाओं और
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        उनक प्रभािी वरयान्ियन, वजसमे अपरािी क े बचन की कोई गुन्जाइि न हो और सवरय सामावजक भागीिारी से ही इस
        तरह क े जघन्य अपरािों पर प्रभािी वनयंत्रि,तिा इनकी रोकिाम की जा सकती है। यह हमला वयवि क े साियजवनक जीिन
        और वयविगत जीिन पर गहरी छाप छोड़ता है, वजससे उसकी आजीविका और ऱोजगार की संभािनाएं चुनौतीपूिय हो जाती

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        हैं। इस मुद्दे को हल करने क े वलए, भारत सरकार ने एवसड अटक पीवड़तों या प्रभावितों को आर.पी.डब्ल्यू.डी. अविवनयम,
        2016 क े तहत उनकी भलाई और क्याि सुवनवित करने क े वलए िावमल वकया है।

               तेज़ाबी हमल से प्रभावित लोगों को िेखकर ही सरलता से पहचाना जा सकता है  इनक िरीर क े विवभन्न अंगो पर
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        जलन क े गंभीर वनिान हो सकते है और अक्सर इनमे िारीररक विकृवतया भी हो सकती हैं।
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             दृवष्ट िोष उस वस्िवत की ओर इिारा करता है जहााँ िेखन की क्षमता में इतनी कमी हो जाती है वक इससे विन प्रवतविन
                                                क े कायय भी प्रभावित होने लगते हैं।
        7. अंधता

               अन्िता से एक ऐसी ििा अवभप्रेत है वजसमें  सिोत्तम  सुिार क े पिात वयवि  में वनमनवलवखत वस्िवतयों में से कोई
                                                                                                  े
        एक वस्िवत विद्यमान होती है- (I) दृवष्ट का  पूियतया  अभाि; या  (II) सिायविक संभि सुिार क े साि बहतर आाँख में दृवष्ट
        सुतीक्षिता 3/60 से कम या 10/200 (स्नेलन) से कम; या (III) 10 वडग्री से कम क े वकसी कोि पर कक्षातररंत दृश्य क्षेत्र

        की पररसीमा; (आर.पी.डब्ल्यू.डी. 2016)।
        तावलका-8 : विविष्ट चकवलस्ट : अंधापन(अन्धता)
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           क्र.सं.
                                    विवयांगता की वस्थवत                         विद्याथी का क्रमांक
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                 क्या यह विद्यािी पूरी तरह से अंिा है यानी वक इस िोनों आाँखों से कुछ नहीं
           1.
                 विखाई नहीं िेता?

           2.
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                 क्या इस विद्यािी की आंख विषम/भगी(असंरवखत अििा मुड़ी हुई) हैं,
                 अिायत िोनों नेत्रगोलकों की वस्िवत वभन्न प्रतीत होती है?
           3.  क्या यह विद्यािी हरे और नीले या लाल और हरे रंग में अन्तर नहीं
                 कर पाता है?













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